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रिपोर्ट : 'अब्बाजान' पर रिपोर्ट करने की योजना, आउटलुक का ग्रुप एडिटर बर्ख़ास्त

मीडिया संस्थानों पर सत्तारूढ़ दल की पकड़ और निष्पक्ष पत्रकारिता करने वाले पत्रकारों के साथ होने वाले व्यवहार की बानगी देखनी हो तो 'आउटलुक' पत्रिका के ग्रुप एडिटर इन चीफ़ के साथ क्या हुआ, इस पर एक नज़र डालिए।

'आउटलुक' पत्रिका के ग्रुप एडिटर इन चीफ़ रूबेन बनर्जी 33 दिनों की छुट्टी के बाद बुधवार को दफ़्तर पहुँचे, ज्वाइन किया और वरिष्ठ संपादकों से अगली कवर स्टोरी के लिए 'अब्बाजान और योगी' पर स्टोरी करने को कहा।

इसके दो घंटे बाद उन्हें नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया। कंपनी के चीफ़ एग्ज़क्यूटिव इंद्रनील राय ने उन्हें अनुशासनहीनता के आरोप में नौकरी से निकाल दिया।

वजह

प्रबंध निदेशक सुनील मेनन ने इस्तीफ़ा दे दिया।

इसके पहले सोमवार को ही चिंकी सिन्हा को पत्रिका का संपादक नियुक्त किया गया था।

बनर्जी ने 'द प्रिंट' पत्रिका से कहा, "मैंने 12 सितंबर को कहा था कि मेरी तबियत ठीक नहीं है, लिहाजा, मेरी छुट्टी बढा दी जाए। ड्यूटी ज्वाइन करना अनुशासनहीनता कब से हो गई"



पत्रिका की सामग्री के मुद्दे पर पत्रिका के प्रबंधन से उनकी असहमति थी क्योंकि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाली स्टोरी प्रकाशित कर चुके थे।

प्रबंधन की सफाई

मुख्य कार्यकारी इंद्रनील राय का कहना है कि 'आउटलुक' पत्रिका के महात्वाकांक्षी डिजिटल लॉन्च के समय वे अनुपस्थित थे। लेकिन इसके पहले उन्होंने यह माना था कि बनर्जी की छुट्टी की अर्जी को मंजूरी दी जा चुकी थी।

उन्होंने बनर्जी को एक मेल लिख कर कहा था कि 'वे उनकी बातों से असहमत हैं, लेकिन इन मुद्दों पर बात तब होगी जब वे ठीक हो जाएंगे और दफ़्तर ज्वाइन कर लेंगे।'

राय ने 'द प्रिंट' से कहा,







मुद्दा संस्था की डिजिटल यात्रा का था। मैं युवा और तेज़ तर्रार पत्रकार चाहता था, लेकिन बनर्जी के विचार कुछ और थे। वह समझते थे कि मैं उन्हें दरकिनार कर रहा हूं, जबकि ऐसा नहीं था। उन्होंने छुट्टी पर जाने का फ़ैसला ले लिया।



इंद्रनील राय, मुख्य कार्यकारी, आउटलुक



संपादक का तर्क

रूबेन बनर्जी 2018 में आउटलुक पत्रिका के संपादक नियुक्त किए गए थे। वह 2019 में पत्रिका के मुख्य संपादक, 'आउटलुक मनी' और 'हिन्दी आउटलुक' के मुख्य संपादक बनाए गए। इस साल उन्हें ग्रुप एडिटर इन चीफ़ बना दिया गया।

बनर्जी ने 'द प्रिंट' से कहा, "इतने प्रमोशन से यह साफ है कि मैं अपने कामकाज में अच्छा था। दिक्कत पत्रिका की सामग्री को लेकर हुई। हम जिस तरह की सामग्री छाप रहे थे, प्रबंधन उससे खुश नहीं था।"

उन्होंने पेगासस और टेटर क़ानूनों पर छपी सामग्री का उदाहरण दिया।



पत्रिका के मई अंक में कवर स्टोरी 'मिसिंग' थी। इसका मतलब था कि कोरोना की दूसरी लहर के दौरान सरकार 'मिसिंग' थी, यानी गायब थी। बीजेपी के नेताओं और सरकार के मंत्रियों ने इस पर अपनी नाखुशी का इजहार प्रबंधन के अलावा मुख्य संपादक से भी की थी।

प्रबंधन का जवाब

लेकिन मुख्य कार्यकारी राय ने इससे इनकार किया और दावा किया इस कवर स्टोरी को लेकर कोई दबाव उन पर नहीं था।

कंपनी के प्रबंध निदेशक सुनील मेनन ने एक ट्वीट कर कहा कि 'अब यह अध्याय बंद हो जाना चाहिए। रूबेन बनर्जी मेरे अंतिम संपादक थे, शुक्रिया।'

लेकिन मेनन ने कहा कि उनका इस्तीफ़ा निजी है और यह रूबेन बनर्जी के इस्तीफ़े की वजह से नहीं है।

उन्होंने कहा कि इस संस्थान में चीजें जिस दिशा में जा रही हैं, वे खुद को और अपने मूल्यों को उसके अनुरूप नहीं पाते हैं।

बता दें कि 'आउटलुक' पत्रिका राजन रहेजा समूह का है, जिसके पहले संपादक विनोद मेहता ने 1995 में शुरू किया था। फिलहाल इस समूह में 'आउटलुक अंग्रेजी', 'आउटलुक हिंदी', 'आउटलुक मनी', 'आउटलुक बिज़नेस' और 'आउलुक ट्रैवलर' है।