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केजरीवाल की गारंटी कहीं 'मेड इन चाइना' जैसी न हो जाए

दुनिया में अगर किसी देश के सामान की गारंटी लेने के लिए कोई तैयार नहीं होता है तो वह है चीन। अगर किसी माल पर ‘मेड इन चाइना’ लिखा नज़र आया तो समझ लीजिए कि वह सामान कितने घंटे या कितने मिनट चलेगा, उसकी कोई गारंटी नहीं है। चीन के निर्माताओं ने जब देखा कि उनके माल की गारंटी न होने के कारण अब उसके खरीदार घटने लगे हैं तो उनके शातिर दिमाग ने मेड इन चाइना की बजाय ‘मेड इन पीआरसी’ लिखना शुरू कर दिया था। पीआरसी का मतलब था पीपल्स रिपब्लिक ऑफ़ चाइना।

बहरहाल, यहाँ चीन के माल की नहीं बल्कि गारंटी की चर्चा की जा रही है। गारंटी की चर्चा भी इसलिए कि अभी हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल गोवा और पंजाब गए थे। दोनों जगह अगले साल के शुरू में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। इन दोनों जगहों पर उन्होंने लगभग एक जैसा ऐलान किया। ऐलान यह था कि अगर आम आदमी पार्टी सत्ता में आ गई तो 300 यूनिट तक बिजली मुफ्त कर दी जाएगी। दिल्ली मॉडल का हवाला भी दिया गया जहाँ 200 यूनिट तक बिजली मुफ्त है।

दिल्ली मॉडल का हवाला यह कहते हुए दिया गया कि हम हवा में बातें नहीं कर रहे। जब दिल्ली में बिजली मुफ्त हो सकती है तो फिर गोवा और पंजाब में क्यों नहीं। यह केजरीवाल की गारंटी है। केजरीवाल जो कहता है, वह करता है। दिल्ली में भी करके दिखाया है तो गोवा-पंजाब में भी करके दिखाएंगे। हालाँकि गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने यह ज़रूर कहा कि दिल्ली से आकर यहाँ वादे करना आसान है लेकिन लागू करना बहुत मुश्किल है। चुनावों में तो चांद-तारे तोड़कर लाने के वादे किए जाते हैं लेकिन गोवा की जनता इंटेलिजेंट है।

2017 में भी आम आदमी पार्टी ने गोवा की सभी सीटों पर चुनाव लड़ा था लेकिन एक को छोड़ सभी सीटों पर जमानत भी नहीं बच पाई थी। मगर, केजरीवाल की गारंटी की चर्चा ज़्यादा हुई। वजह यह है कि आम आदमी पार्टी केजरीवाल की गारंटी को पत्थर पर लकीर की तरह का दावा मानती रही है। 2020 के विधानसभा चुनावों में भी दिल्ली में आम आदमी पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र जारी नहीं किया था बल्कि केजरीवाल के वादों की पायदारी दिखाने के लिए केजरीवाल का गारंटी कार्ड जारी किया था। यह कहा गया था कि केजरीवाल जनता से जो वादे करेंगे, वो ज़रूर पूरे करेंगे।

अभी दस दिन में गोवा और पंजाब में केजरीवाल की गारंटी का नारा लगाया गया है लेकिन अब दिल्ली में दो ऐसी घटनाएँ हो गई हैं जिनसे केजरीवाल का गारंटी कार्ड एक्सपायर्ड-सा दिखने लगा है। केजरीवाल की गारंटी का मतलब पत्थर पर लकीर नहीं रह गई। यह बात कोई विपक्षी नेता या केजरीवाल का आलोचक नहीं कह रहा बल्कि दिल्ली हाई कोर्ट ने लगातार दो दिन कहा है।



हाई कोर्ट ने तो यहाँ तक कहा है कि मुख्यमंत्री जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को तो अपना कमिटमेंट पूरा करना पड़ेगा क्योंकि उन्होंने जो वादा किया है, वह मुख्यमंत्री के रूप में किया है।

दोनों घटनाएँ पिछले साल की हैं और अब हाई कोर्ट तक जा पहुँची हैं। 25 मार्च 2020 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तालियाँ-थालियाँ पीटने वाले लॉकडाउन की शुरुआत कराई थी। तीन हफ्ते का लॉकडाउन घोषित किया गया था। लॉकडाउन घोषित होते ही भय और बेचैनी का माहौल बन गया था। ऐसे में 29 मार्च 2020 को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक प्रेस कांफ्रेंस करके लोगों से घरों में ही रहने की अपील की थी। केजरीवाल ने इस प्रेस कांफ्रेंस में कहा था कि मैं आपका बेटा हूँ और आपसे यह मांग रहा हूँ कि आप तीन महीने तक अपने किराएदारों से किराया न लें। तीन महीने बाद वे बकाया दे देंगे। उन्होंने किराएदारों से भी कहा कि आप दिल्ली छोड़कर न जाएँ। अगर किराएदार किराया नहीं दे सकेंगे तो दिल्ली सरकार किराए का भुगतान करेगी। मोदीजी के ताली-थाली की तरह केजरीवाल ने लोगों से गीता पाठ करने के लिए भी कहा था और बताया कि मेरी पत्नी ने तो पाठ शुरू कर दिया है। रोज एक अध्याय पढ़ें तो 21 दिन कट जाएंगे।

उस वक़्त केजरीवाल की दूसरी विधानसभा जीत ताजा-ताजा ही थी और लोगों के दिमाग में उनका गारंटीकार्ड भी था लेकिन उन्होंने किराए का भुगतान नहीं किया। अब मामला हाई कोर्ट में है और केजरीवाल का गारंटी कार्ड चुनौती पर कसा जा रहा है। केजरीवाल कैसे किराए का भुगतान करेंगे और किसको कितना किराया मिलेगा, अभी इसका हिसाब नहीं है लेकिन मुफ्तखोरी की गारंटी सरकार के लिए भारी पड़ सकती है। पहले ही खजाना खाली है। दिल्ली सरकार के अपने ही ताजा सर्वे के हिसाब से दिल्ली की 34 फ़ीसदी आबादी तो किराए के घरों में रहती है। फ़ैक्ट्रियों और ऑफ़िस वगैरह का हिसाब लगाया जाए तो अरबों में बैठेगा।

 - Satya Hindi

केजरीवाल की दूसरी गारंटी कोरोना योद्धाओं के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपए देने की घोषणा है जो इस वक्त टूटती दिखाई दे रही है। कोरोना योद्धाओं में डॉक्टर, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ़, सफ़ाई कर्मचारी, सिक्योरिटी कर्मचारी, होम गार्ड, टीचर और पुलिसकर्मी शामिल हैं। इनमें वे सभी कर्मचारी शामिल हैं जो परमारेंट, टेम्प्रेरी, कांट्रैक्ट पर या फिर प्राइवेट कर्मचारी हैं। डीटीसी, जल बोर्ड और नगर निगम के कर्मचारी भी कोरोना योद्धाओं के रूप में काम करने का दावा करते हैं। पूरा हिसाब लगाया जाए तो कम से कम 500 कोरोना योद्धाओं की सूची विभागों और यूनियनों के पास हैं लेकिन सरकार इस मामले में उलझन में फँसी हुई है।

इसी उलझन के बीच ही हाई कोर्ट में दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल अमित कुमार की विधवा का मामला भी है। दिल्ली हाई कोर्ट ने यहाँ भी मुख्यमंत्री की गारंटी को चुनौती दे डाली है।



दिल्ली हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा कि उसे कोरोना के कारण जान गँवाने वाले दिल्ली पुलिस के सिपाही के परिवार को 1 करोड़ रुपये की अनुग्रह राशि देने के अपने वादे का सम्मान करना चाहिए।

यहाँ यह भी उल्लेखनीय है कि अमित कुमार भारत नगर थाने में तैनात थे और 5 मई 2020 को उनकी मौत हो गई थी। मौत से अगले दिन रिपोर्ट आई थी कि उन्हें कोरोना हुआ था। 7 मई को राज्यपाल अनिल बैजल और मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल दोनों ने ट्वीट करके इस घटना पर दुख जताया था। तब केजरीवाल ने एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने का ऐलान भी कर दिया था। यह सम्मान राशि अब तक अमित कुमार की विधवा को नहीं मिली तो उन्होंने हाई कोर्ट में फरियाद की है। दिल्ली सरकार का कहना है कि अमित कुमार को आधिकारिक रूप से कोरोना ड्यूटी पर नहीं लगाया गया था, इसलिए वह कोरोना योद्धा की श्रेणी में नहीं आते, लिहाजा उन्हें यह राशि नहीं दी जा सकती। मगर, सवाल यह उठाया गया है कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की गारंटी का क्या होगा उनके ट्वीट के रूप में इसी गारंटी को कोर्ट में सबसे बड़े सबूत के रूप में पेश किया जा रहा है।

केजरीवाल अब क्या करेंगे

अब तक आम आदमी पार्टी उनकी गारंटी का राजनीतिक इस्तेमाल सबसे बड़ी विश्वसनीयता के रूप में कर रही थी लेकिन अब तो हाई कोर्ट उनकी गारंटी का मजाक उड़ा रहा है। उनके विरोधी तो इन मुद्दों को हाथों-हाथ लेंगे। जो पुख्ता गारंटी वे अब तक देते रहे हैं, इन मुद्दों के बाद कहीं उसकी हालत मेड इन चाइना जैसे माल की न हो जाए। खासतौर पर अगले साल पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में होने वाले चुनावों में अब वह उतने विश्वास के साथ गारंटी नहीं दे सकते।