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सचिन ने कोरोना महामारी को कैसे हराया? जानें उस 'जानलेवा मैच' का रोमांच

नई दिल्लीपूरी दुनिया कोरोना वायरस की चपेट में है और इसे उखाड़ फेंकने के लिए पूरी कोशिश की जा रही है। राजा हो या रंक हर किसी पर इस महामारी का खतरा मंडरा रहा है। कोई भी इसकी चपेट में आ सकता है। लाखों भारतीयों की तरह मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर भी कोरोना वायरस की चपेट में आ गए थे। हालांकि, उन्होंने कोविड-19 को उसी अंदाज में हराया, जिस तरह से वह क्रिकेट मैदान पर विपक्षी गेंदबाजों के हौसले पस्त कर दिया करते थे।

मास्टर ने महामारी कोरोना वायरस पर रोमांचक जीत की कहानी के बारे में जी न्यूज से बताया कि यह मैच आसान नहीं रहा। उन्होंने कहा- जब बोलर अच्छा स्पैल कर रहा हो तो बल्लेबाज को बैकफुट पर जाकर खेलना होता है। मैदान पर बैट्समैन अकेला ही होता है उसे गेंद खेलना होता है, मगर बिना टीम के वह मैदान पर जाकर नहीं खेल सकता है। वैसे ही रिकवरी के लिए मेरे साथ मेरी फैमिली थी। दोस्त थे और सबसे खास डॉक्टर्स थे। उन्होंने मेरा बहुत अच्छा ख्याल रखा।




सचिन ने बताया कि जब मुझे सिम्टम्स पता चले तभी मैं आइसोलेट हो गया और रिपोर्ट बाद में आई। यह मेरे लिए अच्छी बात रही। कोविड-19 कन्फर्म होने के बाद डॉक्टरों ने कहा कि एक सप्ताह देखते हैं, अगर जरूरत पड़ेगी तो हॉस्पिटल में भर्ती होना होगा। उस दौरान मुझे काफी तकलीफ थी। तबीयत थोड़ा बिगड़ी तो हॉस्पिटल गया। इस दौरान मेडिकल टीम ने जो भी मुझे सुझाव दिए उसे मैंने पूरी तरह से फॉलो किया।




क्रिकेट के भगवान कहे जाने वाले पूर्व भारतीय क्रिकेटर ने रिकवरी के बाद के संघर्ष को बताते हुए कहा- जब मैं अस्पताल से घर लौटा तो डॉक्टरों की सलाह पर एक सप्ताह और आइसोलेट रहा। कुल मिलाकर कोरोना के साथ मैच का अनुभव मुश्किल था। साथ ही उन्होंने अपने ब्लड डोनेशन के बारे में बताते हुए कहा- हाल ही में मेरी फैमिली के एक मेंबर का बड़ा ऑपरेशन हुआ था। इसमें काफी ब्लड की जरूरत थी हम सभी पैनिक हो गए थे। एक अनजान व्यक्ति ने ब्लड देकर जान बचाई थी। मैं उनके बारे में नहीं जानता, लेकिन उन्हें शुक्रिया कहना चाहता हूं।



सचिन ने बताया कि इसके बाद 14 जून को वर्ल्ड ब्लड डोनेशन डे के मौके पर मैंने और मेरी टीम ने ब्लड डोनेट करने का फैसला किया था। बता दें कि सचिन तेंडुलकर रायपुर में रोड सेफ्टी वर्ल्ड सीरीज में हिस्सा लेने के बाद कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए थे।