घर में किसी की मौत होती है तो जानिए कैसे आप पर इसका फाइनेंशियल प्रभाव पड़ता है, क्या तैयारी करें

घर में किसी की मौत होती है तो जानिए कैसे आप पर इसका फाइनेंशियल प्रभाव पड़ता है, क्या तैयारी करें



जब अपने घर में किसी की मृत्यु होती है तो सबका वास्तविकता से पाला पड़ जाता है। इसका असर ना सिर्फ अपने जीवन पर, बल्कि आर्थिक हालत पर भी पड़ता है। कोरोना से हुई मौतों पर आज देश के हजारों और लाखों परिवार इस संकट से जूझ रहे हैं। लोगों को समझ में नहीं आ रहा है कि पर्सनल लॉस को कैसे सहन किया जाए।

साथ ही साथ असेट्स के ट्रांसफर हेतु आवश्यक दस्तावेजों को कैसे जुटाया जाए। मृतक की वित्तीय जानकारी जैसे कि उनके अकाउंट, इन्वेस्टमेंट, लोन, टैक्सेशन और बीमा के मुद्दे को कैसे सुलझाया जाए।

बहुत ही मुश्किल होता है ऐसा समय

ये कार्य अक्सर असंभव लगते हैं। खासकर तब, जब अगर आर्थिक रूप से सक्रिय पति या पत्नी गुजर जाते हैं। हालांकि ऐसा करने के लिए एक वकील और वित्तीय सलाहकार को नियुक्त करना बुद्धिमानी होगी, पर लोग अक्सर यह नहीं समझ पाते कि किस पर भरोसा करना है या कहां से शुरू करना है।

कानूनी वारिस क्या होता है

किसी कानूनी वारिस (legal heir) के सर्टिफ़िकेट का उपयोग मृतक के जीवित उत्तराधिकारियों की पहचान और संबंध को साबित करने के लिए किया जाता है। उत्तराधिकार अधिनियम (Succession Act) में यह काफी सीमित है। केवल फायदा, मुआवजा या बीमा, भविष्य निधि, पेंशन, बिजली कनेक्शन, बैंक जमा, आदि जैसे अधिकारों का दावा करना ही इसमें शामिल है।

उत्तराधिकार का प्रमाण पत्र

दूसरी ओर उत्तराधिकार प्रमाण पत्र का उपयोग उत्तराधिकारियों की प्रमाणिकता को साबित करने के लिए किया जाता है ताकि मृतक के सभी कर्ज और प्रतिभूतियों (debts and securities) को उन पर पास किया जा सके। हालांकि उत्तराधिकार का सर्टिफिकेट केवल अचल संपत्ति को ट्रांसफर करने के लिए काम करेगा। पर एक कानूनी वारिस का प्रमाणपत्र चल संपत्ति को ट्रांसफर करने के लिए काम कर सकता है।

आपको अगर उत्तराधिकार प्रमाणपत्र चाहिए तो इसके लिए कोर्ट में आप जा सकते हैं। कोर्ट इसके लिए कुछ फीस भी लगाता है। हालांकि आपको चाहिए कि हमेशा आप एक प्रोबेट ऑफ विल यानी वसीयत बनवा लें। यह वसीयत किसी भी झगड़े या अधिकार के समय आपको काफी मदद कर सकती है।

कैसे करें तैयारी

आपको चाहिए कि मृतक से संबंधित जितने भी डाक्यूमेंट हैं, उसे जुटाएं। इसमें जितना ज्यादा आप डाक्यूमेंट जुटाएंगे, आपके लिए वह उतना ही मददगार होगा। इसके अलावा परिवार के सदस्य की मृत्यु के बारे में वित्तीय संस्थानों जैसे बैंक, बीमा कंपनी आदि को सूचित करना जरूरी है। फिर वे आपको सूचित करेंगे कि आगे कैसे बढ़ना है।

सभी डॉक्यूमेंट जुटाएं

आपको चाहिए कि सभी महत्वपूर्ण डॉक्यूमेंट आप कलेक्ट करें। इसमें तमाम सरकारी और वित्तीय संस्थानों के डॉक्यूमेंट हों। इसे दो सेट के साथ लगाएं। एक फाइनेंशियल डॉक्यूमेंट और दूसरा मृतक का पर्सनल डॉक्यूमेंट हों। इसमें पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी, लाइसेंस जो भी हों, सभी को कलेक्ट करना चाहिए।

अगर मृतक ऑन लाइन निवेश करता है तो आपको कोशिश करनी चाहिए कि इससे संबंधित सभी लॉग इन आईडी और पासवर्ड भी लिए जाएँ। आपको डेथ सर्टिफिकेट भी रखना होगा।

सतर्कता जरूरी है

परिसंपत्तियों को सुरक्षित रखने, खातों को ट्रांसफर करने या बंद करने, दावा करने, इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) दाखिल करने या कर्ज चुकाने जैसे कार्यों के लिए भी आपको सतर्क रहना होगा। अगर आप बीमा का दावा करते हैं तो दो काम आपको करने होंगे। इसमें पहला क्लेम करना होता है और दूसरा पॉलिसी को बंद करना होता है।

बीमा कोई भी हो, ट्रांसफर नहीं होता है

बीमा चाहे टर्म का हो, ट्रेडिशनल हो या एन्यूटी वाला प्लान हो, कोई भी लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी ट्रांसफर नहीं होती है। पॉलिसीधारक की मृत्यु पर यह समाप्त हो जाती है। दावा करने के लिए, असाइनी, नॉमिनी, करीबी रिश्तेदार या एजेंट बीमाकर्ता को तिथि, स्थान और मृत्यु के कारण के साथ जल्द से जल्द एक क्लेम इंटीमेशन भेज सकते हैं।

बीमा कंपनियां मांगती हैं यह कागजात

बीमा कंपनी को जो मुख्य डॉक्यूमेंट चाहिए होता है उसमें दावा करने वाला फॉर्म, मृत्यु प्रमाण पत्र, पॉलिसी डॉक्यूमेंट्स, डीड ऑफ असाइनमेंट के कार्य यदि कोई हों आदि। बीमा कंपनी और भी डॉक्यूमेंट पूछ सकती है जो इससे संबंधित होगा।

अगर हेल्थ बीमा हो तो क्या करें

किसी व्यक्ति के नाम पर एक क्षतिपूर्ति स्वास्थ्य योजना (indemnity health plan) के मामले में, कवरेज खुद समाप्त हो जाता है। अगर कोई वाहन बीमा है तो पॉलिसीधारक की मृत्यु होने पर, मोटर बीमा को वारिस को ट्रांसफर किया जा सकता है। ट्रांसफर तभी संभव होगा जब पॉलिसी लैप्स नहीं हुई होगी।

मृतक का सोशल मीडिया अकाउंट

मृतक के सभी सोशल मीडिया खातों को बंद करना महत्वपूर्ण है क्योंकि इनका दुरुपयोग किया जा सकता है। हालांकि, ई-मेल को को आप रख सकते हैं क्योंकि यह कभी-कभी ऐसे मामलों में काम में आ जाता है। फोन और सिम कार्ड को भी बरकरार रखा जाना चाहिए और सभी डेटा को कंप्यूटर में रखना चाहिए। फोन में पासवर्ड, स्कैन किए गए दस्तावेज़, लोगों के नंबर आदि जैसी महत्वपूर्ण जानकारी भी हो सकती हैं। सभी क्रेडिट, डेबिट और एटीएम कार्ड को भी काटकर फेंक दें या बैंक से बंद करवा दें।







अगर मृतक ऑन लाइन निवेश करता है तो आपको कोशिश करनी चाहिए कि इससे संबंधित सभी लॉग इन आईडी और पासवर्ड भी लिए जाएँ। आपको डेथ सर्टिफिकेट भी रखना होगा। साथ ही पैन कार्ड, आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी, लाइसेंस जो भी हों, सभी को कलेक्ट करना चाहिए